GIHARAJAATI

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    What is Gihara Caste ?
    ***What is Gihara Caste ? Mr. Amrit Lal(Gihara) *** What is Gihara? Gihara is not just the word. Gihara term indicates the Caste. Millions of Gihara lives in different states of India. This caste doesn’t have its existence thats the reason it has lost its identity. Gihara caste people know by various names in the country thats the reason they could never recognise by the name Gihara. These people could not consolidate themselves in one state and never disclosed their identity and language in front of this world reason behind they were very poor and illiterate.Gihara people are always very hard working and they fulfilled the needs of their family by any means. Gihara caste people never contributed in politics if they could have entered in politics than they would have their own identity and better position in society. The main reason of loosing identity is they were never be documented in History of India. The situation is changing now, children’s are studying and they are more aware about the world now.Gihara people are now employed in Government services and their business are also doing well. Gradually the standard is getting better. Mr. Amrit Lal’s great efforts now could put Gihara in the list of schedule caste Delhi. But because of the spelling mistake it was mention giara.We do not have any regrets now because with the efforts of Mr. Amrit Lal only Gihara people are making their certificates and availing all government




    


SHAIWAL


    गिहारा जाति क्या है ?
    ***गिहारा जाति क्या है ? गिहारा , यह सिर्फ एक शब्द नहीं है | गिहारा, शब्द एक जाति का सूचक है| गिहारा जाति के लोग लाखों की संख्या में भारत के सभी राज्यों में रहते हैं, गिहारा जाति का अपना कोई अस्तित्व न होने के कारण इस जाति की पहचान नहीं हो पाई है | गिहारा जाति के लोगों को देश के समस्त राज्यों में विभिन नामों से जाना जाता है , यानि यह लोग विभिन्न राज्यों में अन्य जाति नामों से जाने जाते हैं| यह लोग कभी भी पूर्ण रूप से अपने को किसी भी राज्ये में गिहारा शब्द से पहचान नहीं दिलवा पाए हैं |क्यों कि गिहारा जाति के लोग कभी भी किसी एक राज्य में संगठित हो कर नहीं रहे, और अपनी गिहारी भाषा व जाति को प्राय: लुप्त रखते रहे, इसका मुख्या कारण गरीबी का जीवन यापन करना और अनपढ़ होना है | गिहारा जाति के लोग सदेव मेहनतकश रहे हैं , मेहनत करके अपने परिवार का लालन पालन करने में ही लगे रहे | गिहारा जाति के लोगो ने राजनीति में कभी योगदान नहीं किया, अगर विभिन्न राज्यों में रहने वाले गिहारा बंधू राजनीति में योगदान करते तथा अनपढ़ न होते तो आज भारतवर्ष में गिहारा जाति कि पहचान होती | गिहारा जाति कि पहचान न होने का मुख्य कारण इस जाति का लिखित रूप में कोई दस्तावेज / इतिहास नहीं होना है | अब स्थिति बदल रही है, गिहारा जाति के बच्चे पढ़-लिख रहें हैं | अब गिहारा जाति में जागरूकता आ रही है | आज गिहारा जाति के बंधू सरकारी नौकरियो में कार्यरत हैं और अपना व्यवसाय भी कर रहें हैं , अब धीरे-धीरे गिहारा बंधुओ का जीवन स्तर ऊँचा हो रहा है | गिहारा जाति को अनुसूचित जाति कि लिस्ट में लाने के लिए दिल्ली के श्री अमृत लाल जी ने अथक प्रयास किये थे, उनके प्रयासों से ही दिल्ली, एक ऐसा राज्य हैं जिसमें गिहारा जाति को अनुसूचित जाति लिस्ट में रखा गया है, परन्तु भारत सरकार ने स्पेलिंग मिस्टेक कर दी थी| गिहारा न लिख कर ग्यारह लिख दिया हैं, हमें अब अफसोस नहीं हैं क्योंकि श्री अमृत लाल जी के प्रयासों से ही आज दिल्ली में गिहारा बंधू अपना अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र (SC)Certificate बनवा रहें हैं, और सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओ का लाभ ले रहें हैं |***मेरे दादा जी श्री अमृत लाल जी का देहांत दिनांक 16 / 12 /2012 ( रविवार ) को हो गया है | Free Clipart



    What is Gihara Caste ?
    ***What is Gihara Caste ? Mr. Amrit Lal(Gihara) *** What is Gihara?




    SHAIWAL


    जनसत्ता समाचार पत्र में दिनांक 15 सितम्बर 1994 को छपे लेख के अनुसार:-
    ***गिहारा जाति क्या है ?***जनसत्ता समाचार पत्र में दिनांक 15 सितम्बर 1994 को छपे लेख के अनुसार अखिल भारतीय गिहारा समाज कल्याण संघ के चौधरी श्री अमृत लाल जी ने अपने लेख में लिखा था :- एक समय इस जाति के लोगों ने आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहे महाराणा प्रताप के अभियान में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए | महाराणा जीते जी लड़ाई में कामयाब नहीं हो पाए | उनका परिवार जंगलों में ही भटकता रहा | उनके अनुयायी आज भी अपने नायक का अनुकरण कर रहे हैं | वे घर बसा कर नहीं रहते | यहाँ वहां घूमते हुए ही अपनी जिन्दगी काट देते हैं | इस बात को सदियाँ बीत गयी हैं | अब उनके लिए एक मोर्चा और बाकी है | उनके चौधरी नाम उपाधि के तौर पर नहीं है | अमृत लाल बैंस,कल्याण संघ का काम आधुनिक सभा संगठनों की शैली में समझें तो महामंत्री की तरह देख रहे हैं | भद्रपद शुक्ल 13 अशीत 17 सितम्बर को गिहारा लोगों की कुलदेवी या आराध्य धर्मधामनी माँ का अवतरण हुआ था| स्वरुप और प्रसंगों के अनुसार यह दुर्गा का ही रूप है | गिहारा जाति के लोग अपनी इष्टदेवी की जयंती धूमधाम से मना रहें हैं | श्री अमृत लाल बैंस ने बताया कि धर्मधामनी जयंती के दिन लालकिले से शोभा यात्रा निकाली जाएगी | लालकिले से आरम्भ होकर मुल्तानी ढांडा, पहाड़गंज पहुँच कर यह यात्रा समाप्त होगी | गिहारा जाति के इतिहास, परम्पराओं और रीतिरिवाजों का विधिवत अध्यन नहीं हुआ है| जनश्रुतियों के अनुसार अपने नायक का अनुसरण करते हुए इन लोगों ने घर परिवार के सुखों को तिलांजलि दे दी | घर बार छोड़ देने के कारण इन्हें गिहारा , गेहारा, गृहारा, घ्यारा और गिहार कहा जाने लगा | अमृत लाल बैंस कहते हैं कि गिहारा शब्द ही सही है | उनके अनुसार इलाहाबाद त्रिवेणी संगम के पास ईलावासिया गाँव में माँ धर्मधामानी का अवतार का अवतार हुआ था | उन्होंने भक्तों को आनंद देने वाली कई लीलाएं की | आगे चलकर गिहारा जाति पर जब भी संकट आये तो धर्मधामानी ने उनसे उबारने के उपाए सुझाये और सामान्य स्थितियों में भी अपने भक्तों का मार्गदर्शन का मार्गशन किया | श्रद्धा विश्वास के बल पर विषम परिस्थितियों में भी प्रसंतापुर्वक रह लेने का अनूठा उदाहरण है | गिहारा जाति निजी तौर पर तो कई लोग श्रद्धा श्रद्धा विश्वास के बल पर संकटों और चुनौतियों का मुकाबला कर लेते हैं | कसी जाति द्वारा समूचे रूप में विश्वास से प्रेरणा लेने की मिसाल गिहारा लोगों में ही मिलेगी | इस जाति के लोगों द्वारा सहे गए संकटों की चर्चा उठाने पर परम्परा के जानकर कहते हैं मध्यकाल में सर्वप्रथम इन लोगों को राजाओं, नवाबों और जागीरदारों के अत्याचार सहना पड़े | ये लोग महाराणा प्रताप के साथ थे | महाराणा प्रताप ने किसी की अधीनता स्वीकार नहीं की , तो गिहारा ही क्यों स्वीकार करते ? उन्होंने भी अपने स्वाभिमान को बनाये रखा | वीर मना गिहारा लोगों का नायक है | इसी जाति के लोगों में जो कथाएं प्रचलित हैं ,उनके अनुसार वीर माना के व्यक्तित्व में भक्ति और शौर्य का अदभुद मेल हुआ था | पगड़ी के रूप में वीर माना की अब भी पूजा की जाती है | भक्त की पगड़ी और भगवती का कलश गिहारा लोगों की जातीय पहचान है | घुमंतू होने के कारण गिहारा लोगों में साक्षरता का प्रचार नहीं हो पाया | आधुनिक अर्थों में वे शिक्षित भी नहीं हैं | इसलिए ज़माने से कोई मदद नहीं मिल पाई | वे पिछड़े ही रहे | लेकिन अपना कामकाज चलाने लायक तकनीक उनके पास हैं | उनकी अपनी बोली है | जरुरत पड़ने पर वे आपस में इशारों से बात करते और एक दुसरे को समझाते या सलाह करते | उनकी सांकेतिक भाषा या कूटलिपी का अध्ययन अभी नहीं किया जा सका है कल्याण संघ के चौधरी अमृत लाल कहते हैं कि गिहारा जनोंकि समस्या पर ध्यान दिया जाना चाहिए | हालत और पिछले इतिहास पर ध्यान दें तो वे अनुसूचित जाती की श्रेंणी में आते हैं | हांलाकि उनका नाम अनुसूचित जाति के लोगों में नहीं लिया गया हैं | उनका कहना है कि गिहारा लोगों को पारंपरिक व्यवसाय के लिए मदद तो दी ही जाए , उन्हें नए काम धन्धे भी सिखाएं जाएँ | कुटीर उद्योग लगाने, छोटा मोटा व्यापार करने और आधुनिक व्यवस्थाओं से लाभ उठाने जैसे बैंक आदि वितीय संस्स्थाओ से कर्ज लेने ,बाज़ार से कच्चा माल खरीदने और तैयार माल खपाने आदि के प्रशिक्षण कि व्यवस्था भी होनी चाहिए | साक्षरता और शिक्षा के प्रसार के लिए भी विशेष प्रयास होने चाहिए | श्री अमृत लाल बैंस का मानना है कि पिछड़ी और दलित जातियों के बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाने के लिए जिस तरह छात्रवृतियां और सहायताएं दी जाती हैं ,वैसी ही या उनसे कुछ विशेष व्यवस्था गिहारा लोंगों के लिए भी होनी चाहिए |*** Free Clipart


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